किडनी की बीमारी for चिल्ड्रन्स ,लक्षण ,कारण,निदान। - HealthUpachar

किडनी की बीमारी for चिल्ड्रन्स ,लक्षण ,कारण,निदान।

कुछ बच्चो मे किडनी की बीमारी जन्म से होती है ।माँ के पेट मे  सोनोग्राफी के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि गर्भस्थ शिशु में किडनी की बीमारी है ।जैसे कि किडनी पर सूजन ,किडनी का आकार छोटा होना आदि । यह समस्या  गर्भ में  पानी की कमी से या माँ ने पाणी कम पाइन की वजह से भी हो सकती है।  यह बीमारिया  जन्म के बाद 3 से 4 वर्षो में डॉक्टरों की मदद से दूर किए जाती है । बच्चो को किडनी की बीमारी से दूर किया जा सकता है । जब यह समस्या बड़े बच्चो मे मीन्स 5 से6 साल की ऊपर की उम्र में हो  तो यह जान पाना मुश्किल होता है कि किडनी की बीमारी है या नही ।

अक्सर किडनी सम्बन्धी रोगों का पता जल्दी नही समझ आता । बच्चो को बुखार है ,uti का संक्रमण है या पथरी है ,यही समझ्या जाता है  ।पर असल मे  जब खून और मूत्र की जांच से और सोनोग्राफी द्वारा ही पता लगाया जाता है की बच्चो में किडनी डैमेज है ।

बदलती आहार पद्धति तथा व्यस्तता के कारण यह होना स्वभाविक है ।क्योंकि खाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स ,अनियमित भोजन ,पानी पीने का अभाव, जंक और फ़ास्ट फ़ूड ,विभिन्न कोल्डड्रिंक्स इन सभी चीजों का असर बच्चों की नाजुक किडनी पर होता है । आपने कई बार पढ़ा होगा या सुना होगा कि बच्चों का शरीर बड़ो के मुकाबले पूरा विकसित नही हुआ होता । ऐसे में ऊपर बताए गए चीजो का असर तो बच्चों में होना ही है।

So ,आइये तो हम देखते है किडनी डैमेज क्या है,उसके लक्षण ,कारण और उपायो के बारे में ।

किडनी की बीमारी

किडनी डैमेज क्या है ।

शरीर मे दो किडनियां होती है ।किडनी का मुख्य कार्य होता है खून को साफ करके उसमे से खराब या unwanted पदार्थों को मूत्र के रूप में या मूत्र के माध्यम से बाहर निकलना । मतलब किडनी शरीर का शुद्धिकरण करती है ।किसी कारण वश इसमे बिगाड़ होने से शरीर का शुद्धिकरण नही हो पाता तथा  मूत्र त्यागने में कठिनाई आती है या बार बार मूत्र आता है और कुछ में तो आधा मूत्र ही बाहर उत्सर्जित किया जाता है और आधा मूत्र किडनी में फिर से वापस आता है  । इसीको किडनी फैलुवर या किडनी डैमेज होना कहते है।

किडनी फैलुवर की समस्या का निदान जल्दी नही हो पाता 50 % किडनी डैमेज होने के बाद इसका निदान होना संभव है। एसे में रोगी के खून में क्रियेटिनिन और यूरिया कि मात्रा बढ़ जाती है तथा यह सोनोग्राफी से  भी स्पष्ट होता हैं।

1 किड़नी डैमेज होने के बाद दूसरी पूरा कार्यभार संभालती है ।कुछ स्थिति में किडनी डायलेसिस पे व्यक्ति को रखना पड़ता है ।यह स्थिति तब आती है जब किडनी 80 से 90 %कम करना छोड़ देती है ।तब कुत्रिम पद्धति द्वारा खून को साफ किया जाता है और किडनी में जमे unwanted पदार्थों को बाहर निकला जाता है इसी को डायलेसिस कहते है ।यह बहोत महंगा होता है। नही तो किडनी ट्रांसप्लांट का ही उपयोग करना पड़ता है ।

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बच्चों में किडनी डैमेज के लक्षण :

बार बार बुखार आना ,या हमेशा बुखार रहना।

रुक रूक के पेशाब आना।

पेशाब करते समय जलन ,दर्द होना ।

पेट मे एक ही जगह दर्द होना।

दिन में 4 बार से काम और 11 बार से अधिक पेशाब होना।

वजन न बढ़ना ।

शरीर में सूजन।

हमेशा थकावट या कमजोरी रहना।

किडनी की बीमारी

 किडनी डैमेज के कारण :

किडनी स्टोन, पथरी ।

मूत्रमार्ग का संक्रमण UTI।

वंशिक रूप से ही बच्चो में किड़नी की समस्या।

कम पानी पीने से।

बहोत देर तक मूत्र रोकना।

दर्द नाशक दवाइयों का अत्यधिक सेवन ।

नमक और शुगर ज्यादा खाने से।

छोटे बच्चों को भैंस का दूध पिलाने से जो कि पचने में कठिन होता है ।

कोल्डड्रिंक्स या सॉफ्टड्रिंक का अत्यधिक सेवन।

मधुमेह के कारण ।

उच्च रक्तचाप के कारण।

किडनी की बीमारी पर  घरेलु बचाव  :

पानी का  ज्यादा सेवन करे।

ज्यादा नमक न दे तथा ज्यादा शक़्कर से बच्चो को दूर रख।

घर का बनाया सात्विक भोजन खिलाए बाहरी आहार का परहेज़ करे।

खाने में फल और सब्जियों को शामिल करें। जो कि पचने में हल्के होते है।या इनका रस और सुप भी पी सकते हैं।

मांसाहार को दूर रखें ।जोकि पचने में काठीन होता है।

कोल्ड्रिंक और सॉफ्टड्रिंक न दे।इसके बजाय नींबू पानी पिलाये या फलो का रस दे।

मनुके का पानी पिलाये ।

मल मूत्र को ज्यादा देर न रोके ।

धन्यवाद, इसकी अधिक जानकारी के लिए आप हमें [email protected] पर सम्पर्क करें।

 

 

 

 

 

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