खुद के हाथ से खाना खाने की आदत बच्चो मे कैसे डाले ।

एक तो बच्चे खाना खाने से मुहँ फेरते है और उनके पिछे दौड लगावो तो भी ओ खाना नही खाते है। ऐसे मे उनके अपने खुद के हाथ से खाना खाने की आदत कैसे डाली जाय ये आज हम इस भाग मे देखेंगे। बच्चे अपने खुद के हाथ से खाना खाने लग जाय ये तो अच्छी आदत है।इससे उनको जितना लगता है उतना ही ओ खाते है औरइसमे उनकी खुद की इच्छा होती है।

खुद के हाथ से खाना कैसे खिलाए 

खुद के हाथ से खाना

इसके लिए हमे सुरू से ही कुछ आदते बच्चो मे डालनी है ।जै से की,

 9 से 10 माह का बच्चा: आप  देखते होंगे की 9 से 10 महिने का बच्चा अक्सर मुह मे हाथ डालता है। उसके हाथ मे जो भी आए ओ उसे मुह मे डालकर खाने की कोशिश करता है।इस बात का हम पुरी से तरह फायदा ले सकते है। बच्चे के हाथ साफ करे उसकी  खेलने की जगह साफ करे , उसके हात मे रवेदार सफरचंद का छिलका उतारकर एक स्लाइस दे । याद रखिए छिलका उतारे बिना नही देना है , नही तो ओ मुह मे अटक जाएगा ।( ऐसा होने पर तुरंत डाॅक्टर के पास लेके जाये)  छिलका उतार ने से उनको निगलने मे आसानी होती है।

ऐसे ही आप चिकु भी दे सकते है , आटे के बिस्कीट भी दे सकते है। पर ये करते हुए आप उनके पास ही रहिएगा।

12माह का बच्चा जब बच्चा 12 माह का हो जाए तब ओ अच्छे से बैठने लग जाते है। तब उन्हे दाल चावल मॅश करके, या आलु मॅश करके नमक डालकर कटोरी मे बच्चो के सामने रख दे । ओ उसे दोनो हाथो से खेलेंगे भी और कुछ कुछ खाएंगे भी। पर इसमे एक बात है की , जादातर बच्चे आप कटोरी मे दो चाहे किसी बत॔न मे ओ उसको फश॔पर पलटी करेंगे और फश॔ से उठाकर खाएंगे। इसिलिए सफाई की सावधानी रखना बहोत जरूरी है।

खुद के हाथ से खाना

एक बार बच्चो को इन सबकी आदत लग जाए  तो ओ आपके हातो से खाना नही खाएंगे। उन्हीके हातो से खाना पसंद करेंगे , और 2 साल का होने तक ओ सब्जी-रोटी भी अपने हात से अच्छे से खाना सिख जाते है। और इतना ही नही ओ खुद से मांगते भी है, प्लेट अपनी चाॅइस से लेते है।उनकी खाने की जगह ओ खुद से तय करते है, और खाना खाते समय बीच- बीच मे अपने हात से पानी भी पिते है।

ऐसीआदत रहने पर 3 साल तक बच्चे बडे लोगो जैसा खाना खाना सिख जाते है। मतलब आप सब्जी-रोटी दाल चावल आचार और सॅलड परोसो तो ओ सब्जी-रोटी के बाद आचार चटेंगे और सॅलड भी खाएंगे ।

पर एक बात याद खाना खाते वक्त उनके साथ रहना है , बीच बीच मे उनको सिखाना है , इसके साथ ये खाना है उसके बाद मे ये खाना है  ।चाहे तो आप उनके साथ खाना खाने के लिये बैठ सकते है और आप कैसा खाते हो ओ उन्हे प्राॅक्टिकली दिखा सकते हो।और वैसे भी बच्चो की ग्रास्पिंग पाॅवर अच्छी होती है , ओ जल्दी सिख जाते है।

इन सब का फायदा ये होता है की बच्चे खुद से खाना खाना सिख जाते है , और सब कुछ खाते भी है।जितना लगता है खाउतना ही ते है।इससे बच्चो की खाने के प्रती जो अरूची होती है ओ खत्म हो जाती है। जैसे की : 17 से 18 माह का बच्चा है उसे भुख नही है  आप बोले चलो खाना खाना है ओ नी भी बोले तो भी आप जबरदस्ती खाना खिलाओंगे तो ओ उब जाता उसकी खाने की इच्छा मर जाती है।

khud ke hath se khana

पर आप उनके हाथो से देने की कोशिश करती है  , तो ओ खाना खाना नही भी बोल रहा होऔर आप उसकी पसंद की reciep कटोरी मे उसके सामने रखते हो  तो उसमे से ओ जरूर 2 ,3 बाइट खाएंगा, भले ही उसे भुख ना हो क्योंकी उसे खुद से खाने का चांस है और खेलने का भी।और उनकी खाने के प्रती रूची भी बढती है।

धन्यवाद , आप को ये भाग अच्छा लगा हो और फायदेमंद रहा हो तो जरूर मुझे comment करे , और कुछ अपडेट्स चाहिए हो तो ओ भी बोल सकते हो।

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