चिड़चिड़ापन दूर करे बच्चो का। - HealthUpachar

चिड़चिड़ापन दूर करे बच्चो का।

बच्चो मे चिड़चिड़ापन आजकल नई बात नही है । बहोत से लोग बोलते है आजकल के बच्चे ही ऐंसे है और बुजुर्ग बोलते है हमारे बच्चे ऐंसे नही थे , हमने चार चार पाच पाच बच्चे संभाले,  ये अकेला  ही संभले नही जाता ।  बच्चो मे चिड़चिड़ापन हमारे  ऐसे बोलने से भी हो सकता है ।एक बात है हम जैसे बच्चो को ट्रिट करेंगे बच्चे वैसा ही बनेगे।कही ना कही हम भी बच्चो मे चिड़चिड़ापन का कारण होते है। आप देखते होंगे आप जैसा व्यवहार करते है वैसा ही व्यवहार बच्चा करता है ।(जैसे : आपके घर मे मेहमान आते है , तो आप उन्हे पाणी , चाय -नास्ता पुछते है उनका हसकर स्वागत करते है तो आपका बच्चा सेम वैसा ही करेगा ।वो उनको दुत्कारेगा नही।)बच्चे मिट्टी की तरह होते है जैसा ढालो बैसे ढलते है ।इसलिए ये सोंचे की बच्चे आपकी Responsibility है जब तक वे सही गलत नही परख सकते और ये भी आपको ही उन्हे सिखाना है। बच्चो मे चिड़चिड़ापन एक आम समस्या है । इसके बहोत से simple भी कारण हो सकते है। नही तो आपका बच्चा अचानक से चिड़चिड़ा बन गया है तो इसका ठोस कारण जरूर जान ले ।

बच्चो मे चिडचिडापन

बच्चो के चिड़चिड़ेपन का कारण :-

  • नया नया school मे जा रहा है।
  • आपका घर शिफ्ट करवाया है ।
  • ओ जिसके बहोत करीब था ओ उसे छोडकर कही गया है।
  • बच्चा चिड़चिड़े बच्चो की संगत मे है।
  • बच्चो का बिस्तर चेंज करवाया है।
  • सर्दीजुकाम है।
  • बच्चे को कब्ज तो नही है , इससे भी बैचैनी होती है और चिड़चिड़ापन भी आता है।
  • भुख की वजह से।
  • मारपीट और डांट से।
  • अकेलेपण से।
  • माँ-बाप और family का बर्ताव कैसा है उसपर ।
  • twins है या दो बच्चे है पहला दुसरे पर जादा हावी है ।
  • नींद पुरी हो न रही है।
  • शरीर मे आयरन की मात्रा कम होने से।

चिड़चिड़ापन दूर करने के उपाय:

लालच न दे  : बच्चो से कुछ करवाने  के लिए किसी भी प्रकार का लालच ना दे । इससे उनमे ऐसी ही आदत लग जाती है। और उसे तोडना मुस्कील हो जाता है । यह आदत तोडते समय बच्चो के चिड़चिड़े होने की संभावना जादा होती है।  इसके बजाय आप उसके कुछ अच्छे कार्य करने पर उन्हे प्रोत्साहीत करे (wow! बहोत अच्छे , मेरा बेटा बहोत होशियार है।) ताकी उनको अच्छी चीजे करने मे intrest आए।थोडा सर्ब रखे उनसे कुछ करवाने के लिए।

बच्चो को दुत्कारे नही : बच्चो को कभी भी दुत्कारे नही उनको समझे बाद मे उनपर रिअॅक्ट करे। बच्चा कुछ करता है या आपसे कुछ कहता है  तो

बच्चो को डाट मार न दे : बच्चो को कभी डाट या मार न दे , इससे बच्चो मे सुधार नही होता बल्की ओ और बिगडने की संभावना होती है । इससे उनके बाल  मन पर परिणाम होता है । इसके बजाय उन्हे प्यार से समझाए।बच्चो का गुस्सा कम करना है तो अपना गुस्सा पहले कम करे। नाकी उनपर अपना गुस्सा उतारे।

इसके पिछे  क्या कारण है : बच्चा गुस्सा कर रहा है या कोई चीज उठाकर फेंक रहा है तो पहले इसके पिछे का कारण जान ले ।बच्चा नया नया schoolमे जा रहा है  तो इसमे यह समस्या जादा होती है । जब तक बच्चा रोते हुए क्यो न हो खुद से अंदर नही जाता तब तक उसको लेकर school के बाहर खडे रहे या मॅडम school के अंदर जाने की इजाजत देती है तो कुछ देर आप उनके साथ रहे ऐसा कुछ दिन करे ।

बच्चो से बाहर (school, ground,tuetionया किसिके घर ) सही बर्ताव मिल रहा है या नही इसपर ध्यान दे ।

बच्चो को संतुलित आहार दे : संतुलित आहार से बच्चो मे कब्ज नही होंगे सही पोषण मिलेगा और पेट भर खिलाए  ।एक ही पदार्थ खाने मे ना दे varity रखे ।

स्वास्थ  पर ध्यान दे :  हमेशा बच्चो के स्वास्थ को लेकर सजग रहे कभी कभी स्वास्थ ठीक ना होने पर बच्चे चिड़चिड़े हो सकते है। सर्दी खासी मे  यह संभावना जादा रहती है ।

बच्चो के साथ रहे : उनको घुमाने ले जाए ।प्यार से समझाए , उनपर भरोसा करे ,प्यार से उनपर अपना होल्ड जमाए बच्चो को बोधकथा सुनवाए उसके रिलेटेड पाञ की प्रशंसा करके तुम भी ऐसे बनो ,ऐसे प्रेरित करे।बच्चो के साथ outdoor , indoor गेम खेले । उनके मन की बात को समझे  उनका विश्वास जिते उनकी बात ध्यान से सुने कुछ गलत करने पर जल्द से उनपर झल्लाए नही ताकी उनके साथ कुछ गलत होने पर या उन्होने गलत करने पर वे खुद आपसे बेझिझक कहे। बच्चो के साथ  parents और friend बनकर रहे।

दुसरेबच्चो से कंपेर ना करे :  अपने बच्चो को दुसरे बच्चो के साथ compare न करे ।इससे बच्चो के मन मे आपके प्रती जो लगाव आत्मियता है उसपर असर हो सकता है ।उन्हे ऐसा लगता है की मेरे parentsमुझे अच्छा  बोलते ही नही हमेशा नुस्ख ही निकालते है । और  आपका बच्चा अच्छा है तो उसमे इगो  उत्पन्न हो सकता है ।उसके इगो पर ठेस पोहचने पर उसके चिडचिडा हो सकता है ।इसलिए बच्चो के साथ या उनके सामने कुछ भी व्यवहार करते वक्त सावधानी बर्ते।

बच्चो की नींद पुरी होने दे । बच्चो की दिनचर्या निर्धारित करे उसपर अमल भी करे ।उनको कही न कही व्यस्त रखे ।घर मे उनके सामने बुरा बर्ताव न करे ।बात-बात पर उन्हे न टोके। बच्चो का बिस्तर अच्छे से लगवाए इससे बदन मे दर्द या नींद मे रूकावट आने ही संभावना होती है ।

इसके बजाय भी आपका बच्चा चिड़चिड़ा है तो तुरंत डाॅक्टर से मिले।

धन्यवाद , आपको यह post अच्छी लगी तथा इसमेकुछ correction चाहिए हो तो और इससे relatedकुछ जानकारी चाहिए तो आप हमे [email protected] पेसंर्पक कर सकते है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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