अलर्जी होने पर बच्चो के लिए उपचार। - HealthUpachar

अलर्जी होने पर बच्चो के लिए उपचार।

बच्चो मे अलर्जी होना साधारण समस्या है। बहोत से  बच्चे sensitive होने से उनमे अलर्जी होती है ।बच्चो  मे बडो से जादा अलर्जी होने की संभावना होती है क्योंकी उनमे immun system पुरी तरह विकसित नही होती है।किसी मे अंनुवांशिक  यानी की पिढीजात ही अलर्जी होने की आशंका होती है। बच्चो मे अलर्जी होने पर नजरंदाज नही करना चाहिए नही तो वह बार बार होती है और  lifetime रहने की चान्सेस होते है। इसकारण वक्त पर डाॅक्टर से सलाह ले और उचित उपाय करे।

अलर्जी होने

बच्चो मे अलर्जी कई प्रकार की हो सकती है

किसी बच्चो मे खाने से अलर्जी होती है तो

कुछ मे धुल या सर्द जगह से और

कुछ बच्चो मे मौसमी अलर्जी होती है जैसे

धुप काल मे धुप से और गर्मी से

मानसुन मे सर्दी -जुकाम रहता है ।

अलर्जी के लक्षण :

  • सिरदर्द या सर भारी होना ।
  • नाक बहना या बंद होना।
  • खाँसी होना।
  • त्वचा पर लाल दाने तथा चकत्ते आना।
  • कभीकभी त्वचा पर बडी फुन्सिया आना।
  • उलटी जी मचलना।
  • पेट दर्द , दस्त लगना।
  • आँखे लाल होना , खुजली और आँखो से पाणी आना।
  • बार बार छिंक आना।

अलर्जी के कारण :

  • मधुमक्खिया काटने से।
  • वांशिक ( वंशानुसार)
  • पालतु जानवरो से जिनपर बाल रहते है ( कुत्ता ,बिल्ली, भेड, गायभैंस)
  • कुछ पेड़पौधो से और उनपर कुछ प्रकार के बैठै किडो के कारण।
  • मुख्यतः धुल से।
  • perfume से।

 अलर्जी होने

बच्चो मे अलर्जी होने पर उपाय ।  :

  1. घर मे धूल ना होने दे हमेशा गीले पौछे से बच्चो के कमरे की और घर की सफाई करे।
  2. आँखे मे अॅलर्जी पर गुनगुने साफ पाणी से मुह और आँखे धोए।हात भी अच्छे से धोए क्योकी अक्सर बच्चे धुल वाली जगह पर हाथ डालते है और वही हाथ आँखो पर मलते है/लगाने से भी अॅलर्जी होती है।
  3. आँखो मे काजल न डाले।इससे भी बच्चो की आँखो मे जलन और खुजली हो सकती है।
  4. धुल वाले कपडे , कालिन, बिस्तर , कर्टन बार बार साफ करे इसमे धुल ज्यादा होती है।
  5. हो सके तो door & windows को पतली जाली लगाए इससे कमरे मे हवा और उजाला भी रहेगा और बाहरी धुल कम आएगी।
  6. धुलग्रस्त जगह से गुजरते वक्त नाक के उपर मास्क लगाए तथा आँखो पर चष्मा डाले।
  7. अनाज साफ करते समय आंगन का इस्तेमाल करे या बाजार से ही बिना धुल बाले अनाज खरिदे ( जैसे : गेहू , ज्वार, बाजरा आदी) ।
  8. बच्चो को हमेशा सुती और ढीले कपडे पहनाए जिससे उनमे गर्मी से आने वाला पसीना सुख जाए। हमेशा साफ कपड़े पहनाये, हो सके तो कपड़े डेटोल के पानी से धोएं।
  9. नमी वाले जगह पर बच्चो के कपड़े या टॉयज न रखे ।
  10. बाहरसे आने पर बच्चो के हाथ पांव धोये और कपड़े बदले। बच्चो को
  11. बच्चो को जब भी तेल से मालिश करे तो 1/2या 1 घन्ते में नहलाये  ताकि तेल के कारण बदन पर धूल या मिट्टी न चिपके इससे भी अलर्जी हो सकती है।
  12. Madumakhi के काटने पर नारियल के तेल में कपूर डालकर लगाए ।
  13. कपूर को पूरे घर के कोने में  डाले इससे निरजन्तुकी करन  होगा ।
  14. बच्चो के शरीर पर जब फोड़े या फुंसिया दिखे तो बिना देरी किये डॉक्टर के पास जाये। कभी कभी यह किसी कीड़े ने काटने से भी हो सकते है।
  15. मौसम बदलने पर बच्चो का विशेष रूप से ध्यान रखे।

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