टाइफाइड के बुखार पर सावधानिया। typhoid

टाइफाइड को हिन्दी मे मियादी भी कहते है ।बच्चो मे टाइफाइड सेल्मोनेला टाॅयफी  नामक किटाणुओ से होता है।यह किटाणु संक्रमित व्यक्ती के मल, मुञ , थुक और खुन मे पाये जाते है । बाद मे यह किटाणु बाहरी गंदगी मे मिलकर यह खाद्यपदार्थ और पेयजल से शरीर के अंदर प्रेवेश करते है और रक्तप्रवाह मे मिल जाते है और टाइफाइड के बुखार के अलग अलग लक्षण दिखाई देते है। बच्चो मे टाइफाइड  के  बुखार पर ध्यान न देने से जान भी जा सकती है। बच्चो मे टाइफाइड या बडो मे लीवर खराब होने से होता है  और इसमे बहोत तेज बुखार रहता है बुखार 100.4, 100.3 हो सकता है । वैसे देखा जाए तो यह एक संक्रमन या वायरल इन्फेक्शन है जिसके चलते रोगी की जान भी जा सकती है। इसलिए इसका इलाज जल्द करे या डाॅक्टर के पास जाकर सही दवाइयाँ और सही चेकअप करे। टाइफाइड के बुखार करीबन 2,3 हप्ते से लेकर 40 दिन तक रह सकता है। वैक्सीन और एंटीबायटिक्स से रोका जा सकता है।

 टाइफाइड के बुखार

टाइफाइड के लक्षण : 

  1. इसमे बहोत तेज बुखार आना।
  2. ठंड , कपकपी होना।
  3. भुख न लगना।
  4. लीवर पर सुजन आना
  5. इसमे दस्त भी लग सकते है।
  6. कम जाद बुखार होना।
  7. बुखार मे त्वचा ( छाती और पेट ) पे लाल रॅश आना।
  8. पेट मे कब्ज तथा पेट फुलना आदी।

टाइफाइड के कारण : 

  1. दुषित खाद्यपदार्थ और पाणी  से इसके किटाणु शरीर मे प्रवेश करते है ।
  2. संक्रमित व्यक्ती संपर्क मे आने से ।
  3. मक्खिया और मच्छर बैठे खाद्यपदार्थ खाने से तथा पिने से।
  4. दुषित पाणी से नहाने से ।घर मे दुषित पाणी का सार्वजनिक उपयोग करने से।( कुल्ला करना, हात धोना , बर्तन धोना आदी )।
  5. फल और सब्जिया बिना धोए इस्तेमाल करने से।
  6. संक्रमित व्यक्ती का झुटा खाने से या पिने से।
  7. खाने से पहले और टाइलेट के बाद हॅन्डवाॅश न करने से

टाइफाइड के बुखार पर इलाज:

डॉक्टर के पास जाकर चेकअप करवाए उनसे सलाह ले । vaksin दे ।

एंटिबायटिक्स से भी टाइफाइड रोका जा सकता है ।

कुछ घरेलु उपायो से भी टाइफाइड की रोकथाम की जा सकती है।: –

सफाई : बच्चो को हॅन्डवाॅश करवाए ।टाॅइलेट बाथरूम घर और खासकर रसोई हमेशा साफ रखे। बाहर से आए खाने की चीजो को नीट & क्लीन करे। बारीश के मौसम मे मक्खियो को  घर से दुर रखे । हायजेनिक किचन को follow करे । जादातर बारिश और धुपकाले मे बाहर की चटपटी और तली भुनी चीजे न खाए। बारिश मे गंदगी अपनी चरन सीमा पर होती है और धुपकाले मे पाणी की किल्लत के कारण हलवाई कैसा पाणी use करते है पता नही बर्तन किस पाणी से साफ करते है यह आप देखते ही होंगे। मक्खियाॅ और मच्छर बैठै हुए खाद्यपदार्थ न खाए या पिए। क्योंकी जैसे की उपर हमने पढा की टाइफाइड के किटाणु रूग्न के मल , मुञ , थुक मे  पाए जाते है और  यह मक्खिया / मच्छर इसपर  बैठै तो यह किटाणु इनको  चिपककर  खाद्य पदार्थ मे आ जाते है।

पुदीना और अदरक का काढा टाइफाइड मे लाभकारक है।

प्याज का रस पिलाए।

तुलसी के पत्ते +कालीमिर्च + अदरक को उबालकर काढा बनाए यह दिन मे 2 से3 बार पिए।

तरल पदार्थ का सेवन करे जादा पाणी पिए ये सब हल्का गरम दे।इससे शरीर मे पाणी की माञा बनी रहेगी और डिहायड्रेशन  नही होगा।

बच्चो  को खाने मे मौसमी का रस , सेब ,नारियल पाणी, दुध , फल और पचने मे हल्के पदार्थ दे।तलीभुनी चीजे न दे ।ठंडी चीजे न खिलाए ।

सुखी और भुनी हुई हरीज्वार को पाणी मे नमक डालके  उबाल ले इसका पाणी पिने को दे ।

रोगी के सिर पर ठंडे पाणी की पट्टिया रखे  पर जादा ठंडा पाणी न ले।

बच्चो को fresh वातावरण मे रखे। बच्चो को संक्रमित व्यक्ती के पास न जाने दे ।बाहर जाते वक्त घर से भरे पाणी की बोतल ले । purified water का या उबले  पाणी का इस्तेमाल करे ।

धन्यवाद , यह postअच्छा लगा हो और इससे संबधित अधिक जानकारी के लिए हमे [email protected] पर संपर्क करे।

 

 

 

 

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