नवजात शिशुओं की देखभाल कैसे करें। - HealthUpachar

नवजात शिशुओं की देखभाल कैसे करें।

नवजात शिशु घर मे खुशियां ले आता है । पर खुशीयोंको किसी की नजर न लगे इसलिए शिशुओं की देखभाल  सबसे अहम है । पुराने जमाने मे एकत्रित family की वजह से बुजुर्ग महिलाएं शिशुओं की देखभाल सही से कर लिया करती थी पर शहरीकरण औऱ विभक्त family होने से आजकल नए पेरेंट्स को  शिशुओं की देखभाल की इतनी knowlege नही होती । तथा आप भी नए नए पेरेंट्स बने हो  और नवजात शिशुओं की देखभाल कैसे करनी है यह जानना चाहते हो तो आप सही जगह पे हो ।

आइए तो हम देखेंगे कि आपके नवजात शिशुओं की देखभाल  कैसे करे।

शिशुओं की देखभाल

शिशुओं की देखभाल कैसे करे :

जांच करवाएं :

जन्म के बाद डॉक्टरों से शिशु के सेहत के बारे में पूरी जानकारी ले ।   उसकी मल मूत्र त्याग करने की वारंवारता  , पीलिया या निमोनिया से ग्रसित तो नही है , उसका वजन और आपके मन मे जो भी सवाल हो उसके बारे में डॉक्टरों से पूछ लें । उसके बाद ही घर ले जाने का निर्णय ले ।

माँ का दूध बच्चे का आहार होता है तो यह जांच ले कि माँ को दूध उतरता है या नही बच्चे का पेट माँ के दूध से नही भर रहा हो तो डॉक्टरों से दवाइया ले या बच्चो को डिब्बे का दूध  या गाय का  दूध पिलाना हो तो वह भी कंसल्ट करे तथा उसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए और कैसे ,कब पिलाये इसका पूरा विवरण ले ।

बच्चो को जन्म के बाद टिका लगवाये तथा बाकी के वैक्सीनेशन का विवरण भी ले ।

MMR वैक्सिन ( खसरे का टिका ) आवश्यक है बच्चो के लिए।

शिशुओ का रखरखाव।

  • पहले तो शिशु को जो भी आप कपड़े पहनाने वाले हो या इस्तेमाल करनेवाले हो वह एकदम साफ , सूती , मुलायम,  थोड़े सैल , पहनने के लिए आसान ।तथा नए लाये हो तो एक बार पानी मे भिगोकर सुखाकर इस्तेमाल करे क्योंकि  इससे शिशुओं की नाजुक skin पे रैशेस नही आते और वह comfort महसूस करते है ।
  • शिशु के बेड पे सफाई बरते उसके झूले में भी । माँ के कपडे भी साफ आराम देह हो । क्योंकि थोड़ीसी भी गन्दी smell से बच्चों को उल्टी हो सकती है । घबराएं नही यह नेचुरल है ।तथापि बच्चो के पास जाते वक्त हाथ  अच्छे से धोएं और कुल्ला करें इससे उनको अलर्जी नही होगी तथा आपके मुंह के smell से वह उल्टी भी नही करेगा । वे बहोत sensitive होते है ।
  • बच्चो को जो भी important कॉस्मेटिक लगते है वह डॉक्टरी सलाह से शिशुओको nursing होम से घर पे लाने से पहले ही ले आये  जैसे कि : baby soap, पाउडर पफ, मालिश के लिए तेल  आदि।
  • नवजात के लिए गादी और तकिये मिलते है वह लाए ।तकिये का इस्तेमाल शिशु के सिर को दोंनो तरफ से सपोर्ट करने के लिए करे क्योंकि उनकी गर्दन सेट नही होने की वजह से उनको सिर जल्द हिलाना नही आता वह एक ही पोजीशन में बहोत देर तक रहता है इससे सिर एक साइड में चपटा होने के चांसेस रहते है ।जितना हो सके उनका सिर सीधा रखें ।
  • उनके कपड़े बाहर सूखने के लिए रखे हो तो घर में लाते वक्त उसे अच्छे से झटक ले ।और पहनाते  वक्त भी यही प्रोसेस करें जिससे कपड़ों में कुछ कीड़े मकोड़े हो तो निकल जाएंगे और धूल जमी हो तो भी।  कपड़े पहनाते समय एक बार अपने हाथों से कपड़ों की अच्छी से जांच करें उसमें चुभने  लायक कुछ अटक तो नहीं गया है। नहीं तो बच्चा रो रो के परेशान हो जाएगा और आपको समझेगा भी नहीं क्या हो रहा है।
  • शिशु के लिए मच्छरदानी ले आए ताकि मच्छरों से उन्हें प्रोटेक्शन मिलेगी । शिशु के कमरे में मच्छर मारने वाली दवाई लगाने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। और क्वाइल लगा रहे हो तो ना लगाएं क्योंकि उसमें धुआ ज्यादा निकलता है। बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • बालक को रोज तेल से मालिश करे  और नहलाये नहलाने के बाद अच्छे से सोने  दे ।नहलाने के बाद फैन चालू हो तो थोड़ी देर के लिए बंद करे क्योंकि ठंड लगने से उसको सर्दी जुकाम हो सकते है । बच्चा जब 1 से 2 माह का हो जाये तो नहाने के बाद सुलाते समय उसकी छाती पर वेपर रब या वेखंड की पावडर लगाए इससे जल्द सर्दी जुकाम नही होंगे ।

शिशुओं की देखभाल

स्तनपान कैसे कराए ।

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद जो माँ को गाढ़ा पिला दूध आता है उसे कोलेस्टम कहते है वह बच्चो की immune system मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी है ।

नवजात शिशु के लिए स्तनपान पूर्ण आहार होता है ।इसलिए बच्चों को समय पर स्तनपान करवाएं ।नवजात शिशु को पहली बार स्तन चूसने के लिए कठिनाई होती है। आप उसकी मदद करें नहीं अच्छे से करना आ रहा हो तो आप नर्स से मदद ले सकते हो वह अच्छे से सिखा देंगी।

शिशु को स्तनपान क्यो कराएं । importance ऑफ feeding।

  • आप  जब भी बेबी को स्तन से लगाये तब आपके निप्पल के ऊपरी हिस्से को तर्जनी और मध्यमा के बीच कैंची जैसा पकड़े जिससे बालक को दूध पीने में आसानी होगी और सांस लेने में तकलीफ न होगी तथा नासिका नही दबेगी।
  • शिशु जितना चाहे उतना उसे पिलाये एक स्तन के बाद दूसरे स्तन को लगाए। एक स्तन को तकरीबन 15 से 20 मिनटों के लिए पिलाये ।  इसके लिए आप डॉक्टरी सलाह भी ले सकते है ।
  • हर 2 घंटे के बाद शिशु को स्तनपान कराए ।शिशु सोया हुआ भी हो तो भी उसको स्तनपान कराए नही तो उनकी जीभ तालु को चिपकने की सम्भावना होती है ।
  • शिशुओं को रात और दिन में स्तनपान कराए। स्तनपान करने के बाद शिशु के lips को मुलायम कपडे से  पोछ ले इससे उसके लिप्स काले नही होंगे ।गुलाबी रहेंगे।
  • स्तनपान होने के बाद बच्चो को डकार जरूर दिलाए । इससे बच्चो को आराम मिलता है  ,पेट मे भरी गैस निकलती है और हल्का महसूस होता है ।
  • डकार दिलाने के लिए शिशु को अपने कंधे का सपोर्ट करके  खड़ा करे याद रखे बचे की गर्दन के पिछले भाग पे अपना एक हाथ और कुल्हों पर दूसरा हाथ ऐसे स्थिति में पकड़े ।तथा उठाना हो या गोदी में लेना हो तब भी यही तरीका अपनाये । ऊपर  दिखाई 2 image में दिखाया है। क्योंकि बच्चो की गर्दन पूरी तरह सेट नही होती  वह लचक सकती है ।औऱ बहोत तकलीफ हो सकती है ।

बच्चो की napi :

  • जन्म के बाद बच्चा काली पॉटी करता है  2 से 3 बार ऐसा होने के बाद वह नार्मल पॉटी करना सुरु करता है ।
  • शिशु दिन में 10 से 12 नापी गंदा करता है ।1 से2 माह के बच्चे कभी कभी 5 से 6 दिन तक या उससे भी ज्यादा time तक पॉटी नही करते  ऐसे में डॉक्टरों की सलाह ले ।
  • बच्चे की नैप्पी ज्यादा टाइम के लिए गीली न रखे इससे बुखार और सर्दी जुकाम हो सकता है ।

स्तनपान के बाद उल्टी :

कुछ बच्चे स्तनपान के बाद उल्टी करते है यह नैचरल है इसमे डरने की कोई आवश्यकता नही है।

 

 

धन्यवाद  दोस्तो , आपको यह जानकारी फायदेमंद लगी हो तो share जरूर करे  , और इससे releted अधिक जानकारी के लिए हमे [email protected] पर सम्पर्क करें।

Image source : free stock photo .

 

error: Content is protected !!