बच्चो में डायबिटीज के लक्षण तथा इलाज। मधुमेह (shugar की बीमारी )।

आजकल की जीवनशैली  के चलते कोई ऐसा नही की जिसको बीमारी नही ,या कोई पूरी तरह तन्दरुस्त हो  । ऐसे में बड़े तो बड़े बच्चे भी अछूते नही रहे ,बच्चो में दिल की बीमारी से लेकर किडनी और डायबिटीज तक सभी ने घेर लिया है । चलिए तो आज हम बात करते है बच्चो में डायबिटीज की।

बच्चो में डायबिटीज गम्भीर समस्या है ,पर बालको में डायबिटीज हो सकती है ,गलत खानपान की वजह से ,या तो मोटापे की वजह से यह सामान्य कारण है ,बालको में डायबिटीज के अन्य कारण भी हो सकते है ।तथा इसपर समय रहते इलाज और जांच करवाने से बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है इसमे कोई गुंजाइश नही ।

बच्चो में डायबिटीज

क्या है डाइबिटिज

शरीर मे इन्सुलिन हार्मोन्स होता है जो कि ग्लूकोज यानी शर्करा को शरीर मे metain रखने का काम करता है ।पर जब इन्सुलिन का कार्य बिगड़ता है या इन्सुलिन शरीर मे बनना बंद हो जाता है तब रक्त शर्करा बढ़ती है और मधुमेह या डाइबिटीज़ होता है ।

दो प्रकार के डायबिटीज़ होती है ।

टाइप 1 : जिसमे शरीर मे इन्सुलिन का उत्पाद होना बंद होता है ।और रक्त शर्करा बढ़ने लगती है ।यह कुछ केसेस में होता है ।

टाइप 2 : इसमे शरीर मे इन्सुलिन तो बनता है पर प्रॉपर कार्य नही कर पाता ।यह टाइप 2 की डायबिटीज  90 % लोगो मे पाई जाती है तथा इसका इलाज आसानी से हो सकता है ।

बालको में डायबिटीज के लक्षण :

हमेशा प्यास लगना : शरीर मे suger level बढ़ाने के कारण बछ्चो में प्यास बहोत लगती है ।

बार बार पेशाब जाना : ज्यादा पानी पीने के कारण अनायास ही पेशाब भी बार बार आती है ।

भूख में बढ़ोतरी : बच्चो को भूख तो लगती है खाना भी खाता है,पर वजन नही बढ़ता या उनका ठीक से विकास नही होता।

कमजोरी ,थकावट : बच्चा हमेशा थका हुआ और कमजोर महसूस करता है तथा सुस्त रहता है ।

इन्सुलिन की कमी के कारण spurti नही रहती ।

डाइबिटीज़ के कारण :

मोटापा या ज्यादा खाना : ज्यादा खाना खाने से या बेवक्त  खाने सेबच्चो में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है फैट में बढ़ोतरी होती है , मोटापा आता है जिससे कि इन्सुलिन के उत्पाद पर असर होता है ।

ज्यादा मीठा खाने  से :जंक फूड, फ़ास्ट फ़ूड के कारण चॉकलेट, या अन्य मीठी चीजों से  दाँत तो खराब होते ही है पर शुगर भी बढ़ती है तथा मोटापा भी ।

शारीरिक गतिविधियों में कमी : आएदिन बच्चे मोबाइल गेम या नेट तथा  TV ,computer  आदिसे जुड़े रहते है  parents को लगता है कि हमारा बच्चा smart होने लगा है ।पर  इससे बच्चों की शारिरिक गतिविधियों पर ध्यान नही दिया जाता ।इसका असर इन्सुलिन की बढ़त पर होता है ।इससे इन्सुलिन नही बढ़ता सिर्फ मोटापा बढ़ता है ।

वांशिक : अगर बच्चो के माँ बाप में डायबिटीज हो तो जन्म से बच्चो में डायबिटीज की सम्भावना रहती है ।तथा आगे चलकर 30 से 35 की उम्र में होने के चांसेस रहते है ।

तनाव या डिप्रेशन से भी मधुमेह होने की सम्भावना बनती है ।

बच्चो में डायबिटीज

बच्चों में डायबिटीज पे उपाय :

  • जितना हो सके बच्चे के खानपान और उसको कही चोट न लगे इसपर ध्यान दे ।
  • बच्चा मोटा हो तो उसका वजन कंट्रोल में लाये  ।
  • बच्चे के खाने में ताली , मसालेदार, ज्यादा मिठी चीजे न दे , सकस और सुपाच्य आहार दे । पत्तेदार सब्जिया , फल,  सर्करा रहित फलो का ज्यूस ,सुप आदि पिलाये ।
  • महीने में एक बार या 3 माह में एक बार रक्त की  जांच कराए और शुगर level जान ले ।
  • समय समय पर डॉक्टरों की सलाह ले ।
  • मेडिटेशन कराए तथा नियमित व्यायाम और मैदानी खेल भी खेलने दे ।
  • बच्चे के school में inform करे कि उसको मधुमेह है ।जररूत पड़ने पर वह भी देखरेख के लिए सतर्क रहेंगे।
  • समय पर दवाइयां दे , इन्सुलिन इंजेक्ट करना हो तो समय पर इंजेक्शन लगवाए।
  • शरीर मे सुगर लेवल maintain रखे।

 

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