माइग्रेन में बच्चों की ऐंसे करे देखभाल । बच्चो में माइग्रेन। - HealthUpachar

माइग्रेन में बच्चों की ऐंसे करे देखभाल । बच्चो में माइग्रेन।

माइग्रेन पुराने जमाने मे कम पाई जाने वाली वयस्को की बीमारी थी । पर गत वर्षों में यह सामान्य समस्या बनने से  बच्चो में भी  हो रही है । ऐसे में माइग्रेन में बच्चों माँ बाप का ख्याल तो रखते है  पर उनकी दैनंदिन जीवनशैली और आहार पर ध्यान नही दे पाते।माइग्रेन में बच्चो को  पूरी नींद की ज्यादा जरूरत होती है तथा उचित समय पर खानपान की ।ज्यादातर माँ बाप व्यस्तता के कारण इन सबका ध्यान नही रख पाते ।और बच्चों को माइग्रेन का सामना करना पड़ता है । आइये तो देखते है माइग्रेन क्या है , माइग्रेन में बच्चों का ख्याल कैसे रखे ,और इसके लक्षण ,कारण।

 क्या है माइग्रेन  :

माइग्रेन यह एक मस्तिष्क विकार है , इसमे रोगी के  आधे सिर में असहनीय दर्द होता है कभी कभी यह पूरे सिर में भी हो सकता है। दिमाग में रक्त पोहचाने वाली नसों में सूजन आने से दर्द होता है । यह बहोत ही तेज और कठिन होता है यह कुछ घंटों के लिए या कुछ दिनों के लिए होना भी संभव है। अक्सर माइग्रेन का दौरा साल में 1 से 2 बार आता है पर काफ़ी केसेस में यह हर रोज दिखने को मिलता है ।

इसपर समय पर इलाज न होने पर ब्रेन हैमरेज या लकवा भी हो सकता है । इसका इलाज जल्द करवाए किसी अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करे ।

माइग्रेन में बच्चों

 

माइग्रेन के लक्षण :

तेज सिर दर्द ।

उल्टी ,मतली, या जी मचलाना।

पेटदर्द ।

तेज आवाज और रोशनी से चिढ़ आना।

आखो में दर्द,पानी निकलना।

माइग्रेन के कारण :

कमजोरी के कारण।

परिवार में किसी को हो तो। यानी वंशानुगत।

पढ़ाई का और मानसिक तनाव।

जाड़ो में सुबह स्कूल में जाने से । ठंड के कारण।

ज्यादा दवाइयों से ।

तेज धूप के कारण ।

आँखों मे दृष्टिदोष के कारण ।

खेलने में ज्यादा ध्यान देने से कुछ बच्चे भूखे रहते है या वक़्त पर भोजन नहीं करते ।इस वजह से भी माइग्रेन हो सकता है।

नींद पूरी न लेने से

माइग्रेन में बच्चों

माइग्रेन में बच्चों  को कैसे संभाले।

  • नींद : बच्चो को नींद की बेहद जरूरत होती है ,क्योंकि नींद में उनके मस्तिष्क का विकास ज्यादा होता है । नींद पूरी होने से वह ताजगी भी महसूस करते है ।इसवजह से बच्चो को कम से कम8 से 9 घंटे की नींद लेने दे । जब स्कूल का time सुबह है तो आप उनको दोपहर में भी थोड़ा सोने दे ।
  • पत्तेदार सब्जियां : भोजन में यह जरुर सामिल करे इसमे मैग्नेशियम प्रचुर मात्रा  में होने से यह  माइग्रेन को दूर रखता है ।  गोभी और ब्रोकली भी जरुर खिलाये इसमे भी मैग्नेशियम पाया जाता है ।
  • बच्चो की दैनन्दिनी : बच्चों की रोज की दैनंदिनी बनाये।इसमे उनका भोजन का समय और नींद का समय निर्धारित कर ।ज्यादा देर तक भूखे रहने से या नींद पूरी न होने से माइग्रेन की समस्या बढ़ती है ।तथा जकड़ भी सकती है ।
  • बच्चो का आहार : बच्चो को जितना  हो सके घर पर बनाया खाना खिलाए ।समतोल आहार दे ।जिसमे प्रोटीन ,मिन्नरल्स और कार्बोहाइड्रेट हो ।
  • दूध : दूध में विटामिन B होता है जिससे कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है। विटमिन B कोशिकाओं को ऊर्जावान बनाके  माइग्रेन से लड़ने में मदद करता है।तथा दूध पुर्ण आहार है और रात को दूध पीने से शांत नींद आती है ।
  • अदरक : रसोइमे अदरक को शामिल करें ,आप अदरक का काढ़ा भी पिला सकते है ।
  • मछली और अलसी : अगर  आप बच्चो को भोजन में मछली खिलासकते हो तो उसमें ओमेगा 3 फैटी आसिड पाया जाता है  ,जो कि मस्तिष्क संबंधी समस्या को दूर रखता है। तथा तनाव और चिंता को कम करने में मददगार है।यह आँखों के लिए भी लाभदायक है ।मछली का सेवन करे नही तो आप शाकाहारी है तो अलसी का भी आहार में समावेश कर सकते है इसमे भी ओमेगा 3 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है ।
  • व्यायाम और मेडिटेशन : आप बच्चो को सुबह व्यायाम और मेडिटेशन करवाये ।मेडिटेशन से दिमाग शांत और relax रहेगा । सुबह  हरि घास पर  नंगे पैर चलाने से बच्चों में ऊर्जा रहती है तथा आँखे भी healthy बनती है ।
  • फल खिलाये : सभी फल खाने में शामिल करें तथा रोजाना 1 सेब का सेवन मायग्रेन को दूर रखता है ।ग
  • लौंग : लौंग के पावडर में नमक मिलाये और इसे दूध में मिलाकर पीने से मायग्रेन से छुटकारा मिलता है ।

 

माइग्रेन में बचाव ।

  • बच्चो को भूखे न रखें ।  अक्सर बच्चे खाना खाये बिना ही  खेलते रहते है या माँ बाप काम मे व्यस्त होने से बच्चों के खानपान पर ध्यान नही दे पाते ।यह ठीक नही है ।
  • पढ़ाई का टेंशन न दे । स्पर्धात्मक जीवन मे बच्चो का पढ़ाई में आगे रहना आम बात है ।पर माइग्रेन की स्थिति में पढ़ाई से बढ़कर उसका स्वस्थ जीवन अधिक मूल्यवान है ।
  • बच्चो को घर का बनाया कहना ही खिलाए बाहरी कहना न दे यहाँ तक कि जंक food , fast food , चॉकलेट, नूडल्स,पनीर, चीज से परहेज़ करे।
  • बच्चो को सलाद खिलाए ।
  • बच्चो के कमरे में natural रोशनी आने दे तथा लाइट्स भी उसके आँखों को आराम दे (ज्यादा भड़कीले या डीम लाइट्स न लगाएं ) ऐसे ही लगवाये।
  • बच्चों को ज्यादा tv  या mobile न देखने दे इससे आँखों मे तनाव होता है जिससे माइग्रेन की स्थिति ज्यादा बढ़ सकती है।
  • उनको जिसमे रुचि हो उसीको प्रेरणा दे fource fully कुछ न करवाए।

तेज धूप में न ले जाये तथा धूप में निकलते समय छाता अवश्य ले । ठंड में बच्चो के कान बंदे रहने दे जिससे ज्यादा ठंड न लगे।

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