हैपटाइटिस बी टिका बच्चों को अवश्य लगवाएं। - HealthUpachar

हैपटाइटिस बी टिका बच्चों को अवश्य लगवाएं।

बच्चों में टिकाकरण के मुताबिक देखा जाए तो हैपटाइटिस बी टिका अनिवार्य टीको में शामिल किया है । वैसे देखा जाय तो हैपटाइटिस बी यह गंभीर बीमारी है जिसके चलते बच्चो की मौत भी हो सकती है पर हैपटाइटिस बी टिका देने से  इसकी बहुत हद तक रोकथाम होना सम्भव है। तथा भारत सरकार द्वारा हैपेटाइटिस बी टिका बच्चों को देना अनिवार्य है ।

हैपटाइटिस बी क्या है ।

हैपटाइटिस बी यह  लीवर (यकृत ) संक्रमण की गम्भीर समस्या है ।हैपटाइटिस बी नामक virus से यह फैलती है। यह एक धीरेधीरे बढ़नेवाला वायरस है जो पुरी तरह से लीवर को फैल करता है , इसकारण लीवर के कैंसर की संभावना रहती है ।तथा रोगी की मृत्यु होती है ।

हैपटाइटिस में पांच प्रकार होते है A,B,C,D,E इनमेंसे B और C हानिकारक होते हैं। इसका रक्त की जांच से  ही  निदान हो पाता है ।हैपटाइटिस बी वाइरस रक्त, थूक से फैलता है ।असुरक्षित यौन संबंध से या इंजेक्शन देते समय एक ही सुई का इस्तेमाल करने से इसके जीवाणु संक्रमित होते है। तथा गर्भावस्था में माता से शिशु में  यह अनायास जाता है । इसका कोई ठोस इलाज नही है पर जोभी इलाज मौजूद है उनको अपनाने से बहुत से हैपटाइटिस बी के मरीज इससे पूरी तरह निजात पाते है ।  कुछ में यह हमेशा के लिए रहता है पर दवाईयों के कारण इसका असर कम दिखाई पड़ता है मरीजोमे।

हैपटाइटिस बी टिका

 

हैपटाइटिस बी के लक्षण :

बुखार।

लीवर को धीरे धीरे पूरी तरह से खोकला करता है ।

भूख की कमी।

थकावट,कमजोरी।

पीलिया की तरह  त्वचा, आँख, नाखून में पीलापन ।

गहरा या पीले रंग का मूत्र।

हैपटाइटिस बी के कारण :

असुरक्षित यौन संबंध ।

इंजेक्शन की सूई का बार बार इस्तेमाल करने से संक्रमित व्यक्ति से निरोगी व्यक्ति में आसानी से ।

गर्भवती माता से उसके बच्चे को ।

संक्रमित ब्लड डोनेटर से ।

हैपटाइटिस बी टिका क्यों है जरूरी ।

हैपटाइटिस बी यह पूरी तरह लीवर को खोकला करता है तथा शिशु पर इसका असर जल्द होने से शिशु की जान भी जा सकती है या चिरकाल (इसको  cronic कहते है )हैपटाइटिस बी इनको रहता है । इससे शिशु को बचाने के लिए तथा हेपटाइटिस बी की रोकथाम के लिए हैपटाइटिस बी वैक्सिन देना जरूरी है । इसका टिका लगाने से करीबन 95 %चांसेस रहते है इससे बचने के।

हेपटाइटिस बी वैक्सिन कब दे ।

यह टिका तीन बार लगवाना जरूरी है ।

  1. जन्म के समय।
  2. डेढ़ (6 सप्ताह में)महिने में।
  3. 6 माह में।

 टिके के दुष्प्रभाव  :

सामान्य बुखार आता है ,

इंजेक्शन दी गई जगह पर लाली , अकडन , तथा दर्द होना।

बच्चा दर्द की वजह से बहोत रो सकता है ।

इसके अलावा और लक्षण दिखाई दे या ऊपरी लक्षण 2 दिनों से ज्यादा रहनेपर डॉक्टरों से मिले ।

 टीके की सावधानियां  :

डॉक्टरों को शिशुओको दे रहे औषधियों के विषय मे बताए , शिशु की टीका लगते वक्त तबीयत ठीक नहो तो डॉक्टरों को उसका पूरा विवरण दे ।

पहले दिए गए टिके के बाद एलर्जी या कुछ विपरीत परिणाम  हुए हो तो उसकी भी जानकारी दे ।

धन्यवाद , इस पोस्ट से related अधिक जानकारी के लिए हमे [email protected] संपर्क करें।

Image सोर्स : free stock image

 

 

 

 

 

 

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